Environment

अपनी खूंटी पर टिका, एक सुनने वाला पत्रकार

….. जी हां, पत्रकार ऐसा भी होता है जो सवाल कम करे, समझे जरा ज्यादा ….. ….. लगभग ४७ साल के उनके कामकाजी जीवन में अनुपम मिश्र का बहुत कहीं आना–जाना हुआ। इस पूरी अवधि में वे नई दिल्ली के… Read More ›

Konkanchi Mega Vaat

A moving documentary film on the numerous power plants mushrooming in the Konkan region of the Western Ghats, the grave injustice meted out to the residents and the rich and diverse life of this highly productive region. Kurush Canteenwala’s eye-opening… Read More ›

रावण सुनाए रामायण

सनातन धर्म से भी पुराना एक और धर्म है। वह है नदी धर्म। गंगा को बचाने की कोशिश में लगे लोगों को पहले इस धर्म को मानना पड़ेगा। अनुपम मिश्र बिलकुल अलग–अलग बातें हैं। प्रकृति का कैलेंडर और हमारे घर–दफ्तरों… Read More ›

प्रलय का शिलालेख

उत्तराखंड में हिमालय और उसकी नदियों के तांडव का आकार प्रकार अब धीरे–धीरे दिखने लगा है। लेकिन मौसमी बाढ़ इस इलाके में नई नहीं है। सन् 1977 में अनुपम मिश्र का लिखा एक यात्रा वृतांत   सन् 1977 की जुलाई… Read More ›

भाषा और पर्यावरण

हमारी भाषा नीरस हो रही है क्योंकि हमारा माथा बदल रहा है। पर्यावरण की भाषा भी बची नहीं है। वह हिंदी भी है यह कहते हुए डर लगता है। पिछले ५०–६० बरस में नए शब्दों की एक पूरी बारात आई… Read More ›

कुछ लाख रसोइये चाहिए

[ लेख ‘गांधी मार्ग’ के जुलाई-अगस्त २०१२ अंक में छपा है ] सौंदर्य केवल लघु होने से नहीं आता। ‘स्मॉल इज़ ब्यूटीफुल’ का पाठ पढ़ाने वाले हमारे पर्यावरण वाले भूल जाते है कि प्रकृति लघु ही नहीं, अति सूक्ष्म रचना… Read More ›