Environment

रावण सुनाए रामायण

सनातन धर्म से भी पुराना एक और धर्म है। वह है नदी धर्म। गंगा को बचाने की कोशिश में लगे लोगों को पहले इस धर्म को मानना पड़ेगा। अनुपम मिश्र बिलकुल अलग–अलग बातें हैं। प्रकृति का कैलेंडर और हमारे घर–दफ्तरों… Read More ›

प्रलय का शिलालेख

उत्तराखंड में हिमालय और उसकी नदियों के तांडव का आकार प्रकार अब धीरे–धीरे दिखने लगा है। लेकिन मौसमी बाढ़ इस इलाके में नई नहीं है। सन् 1977 में अनुपम मिश्र का लिखा एक यात्रा वृतांत   सन् 1977 की जुलाई… Read More ›

भाषा और पर्यावरण

हमारी भाषा नीरस हो रही है क्योंकि हमारा माथा बदल रहा है। पर्यावरण की भाषा भी बची नहीं है। वह हिंदी भी है यह कहते हुए डर लगता है। पिछले ५०–६० बरस में नए शब्दों की एक पूरी बारात आई… Read More ›

कुछ लाख रसोइये चाहिए

[ लेख ‘गांधी मार्ग’ के जुलाई-अगस्त २०१२ अंक में छपा है ] सौंदर्य केवल लघु होने से नहीं आता। ‘स्मॉल इज़ ब्यूटीफुल’ का पाठ पढ़ाने वाले हमारे पर्यावरण वाले भूल जाते है कि प्रकृति लघु ही नहीं, अति सूक्ष्म रचना… Read More ›

How to Make a Forest

…with minimum fuss and maximum effect By Sopan Joshi            [ Published in OPEN magazine ] Before their menfolk started migrating out in droves, before rainwater started running off the eroded slopes of the Doodhatoli mountains in Uttarakhand, the people here… Read More ›

डीज़ल का ईंधनतंत्र

[ इस लेख का संपादित रूप दैनिक हिन्दुस्तान में 16 फरवरी को छपा था ] सोपान जोशी डीज़ल हमारे यहाँ पेट्रोल की तुलना मे चौथाई या तिहाई सस्ता बिकता है। पेट्रोल पर आबिकारी कर डीज़ल की तुलना मे सात गुणा… Read More ›