Environment

समाज नामक संस्था का एक कर्मचारी

[ ये लेख ‘तहलका’ में छपा है ] Farhad.Tehelka सोपान जोशी यह संस्थाओं का जमाना है। सबसे बड़ी संस्था है सरकार। उससे बाहर जो हो वे गैरसरकारी कहलाती है। असरकारी दोनों कितनी होती हैं इसका जवाब देने की जरूरत नहीं… Read More ›

जलवायु परिवर्तन: भोग और विलास का रोग

इस हफ्ते डरबन में हो रही सालाना बहसबाजी प्रतियोगिता हमें प्रलय से नहीं बचाएगी। पर शायद गरीबी से निकलने वाली सामाजिकता हमें बचा ले [ लेख का संपादित अंश दैनिक भास्कर की पत्रिका रसरंग में छपा था। मूल लेख बाद… Read More ›