Media

अपनी खूंटी पर टिका, एक सुनने वाला पत्रकार

….. जी हां, पत्रकार ऐसा भी होता है जो सवाल कम करे, समझे जरा ज्यादा ….. ….. लगभग ४७ साल के उनके कामकाजी जीवन में अनुपम मिश्र का बहुत कहीं आना–जाना हुआ। इस पूरी अवधि में वे नई दिल्ली के… Read More ›

भवानी प्रसाद मिश्र: हम जैसा बोलने वाला एक कवि

सोपान जोशी            [ इस लेख का संपादित रूप ‘तहलका’ के मई 18 के अंक में छपा है ] इतने लिखने वाले कभी नहीं रहे जितने आज हैं। पढ़ने की सामग्री भी इतनी कभी नहीं रही। छापना-छपाना तो लिखने से भी… Read More ›

मनसंपर्क का कंप्यूटर उबुंटु

सोपान जोशी [ इस लेख का संपादित रूप नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान की पत्रिका “गांधी मार्ग” के नवंबर–दिसंबर 2011 के अंक में छपा है ] धूप से तपते हमारे जीवन के रास्ते में गांधीजी एक घने पेड़ हैं। उनकी… Read More ›

राग जॉब्स का अतिशयोक्ति रस

[ इस लेख का संपादित रूप दैनिक भास्कर के 13 अक्टूबर 2011 के दिल्ली संस्करण में छपा था ] ऐसा एक ही बार हुआ कि ऐपल कंपनी का बनाया कुछ खरीदने की मेरी इच्छा हुई। एक कंप्यूटर दिखा था दिल्ली… Read More ›