Science

पुतले हम माटी के

[ लेख ‘गांधी मार्ग’ के नवंबर-दिसंबर २०१२ अंक में छपा है ] आज हम मंगल ग्रह के भूगोल के करीबी चित्र देखते हैं, चाँद पर पानी खोजते हैं और जीवन की तलाश में वॉएजर यान को सौरमंडल के बाहर भेजने… Read More ›

कुछ लाख रसोइये चाहिए

[ लेख ‘गांधी मार्ग’ के जुलाई-अगस्त २०१२ अंक में छपा है ] सौंदर्य केवल लघु होने से नहीं आता। ‘स्मॉल इज़ ब्यूटीफुल’ का पाठ पढ़ाने वाले हमारे पर्यावरण वाले भूल जाते है कि प्रकृति लघु ही नहीं, अति सूक्ष्म रचना… Read More ›

जलवायु परिवर्तन: भोग और विलास का रोग

इस हफ्ते डरबन में हो रही सालाना बहसबाजी प्रतियोगिता हमें प्रलय से नहीं बचाएगी। पर शायद गरीबी से निकलने वाली सामाजिकता हमें बचा ले [ लेख का संपादित अंश दैनिक भास्कर की पत्रिका रसरंग में छपा था। मूल लेख बाद… Read More ›

चौमासा मीमांसा: बदलते मॉनसून के लक्षण

(यह लेख १० जुलाई को दैनिक भास्कर की रविवारी मैगजीन में सम्पादित रूप में छपा है|) हमारे भविष्य में जितनी बाढ़ है उतना ही सूखा भी। पूर्वानुमान लगाना दूभर होता जा रहा है – सोपान जोशी सोमवार 11 जुलाई को… Read More ›

Mercurial Monsoon

The famously capricious rains are reinforcing their reputation every year. Our planners need to take a hand in this Act of God By SOPAN JOSHI Its semantic density is comparable to that of a block of reinforced concrete. The India… Read More ›