Sanitation

My thoughts about sanitation

छपाक्! – ‘जल थल मल’ की कहानी

[ यह लेख रज़ा फाउण्डेशन द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक ‘समास’ के वर्ष ७ अंक १८ में छपा है। ] सोपान जोशी  |  सभी चित्र सोमेश कुमार द्वारा   तीन व्यंजनों को मिला के बना एक शब्द है ‘छपाक्’। एक बार इसे… Read More ›

साधारण-सा जीवन, दो असाधारण किताबेंः जोसेफ जेंकिन्स

[यह लेख ‘गांधी मार्ग’ पत्रिका के जनवरी-फरवरी 2013 अंक में छपा था।] …………….. सिर के ऊपर पारंपरिक स्लेट पत्थर की छत और पाँव के नीचे अपने ही मल-मूत्र से बनी खाद। जोसेफ जेंकिन्स के दो प्रसिद्ध परिचय हैं। 15 साल… Read More ›