जलवायु परिवर्तन

सूखाः एक दरिद्र समाज की चुनावी त्रासदी

[ यह लेख ‘इंडिया टुडे’ पत्रिका के 26 जून 2019 के अंक के 36वें पन्ने पर छपा है ] – सोपान जोशी बस, एक महीने की बात है। हम बाढ़ से होने वाले नुकसान की बात कर रहे होंगे। तब… Read More ›

चौमासा मीमांसा: बदलते मॉनसून के लक्षण

(यह लेख १० जुलाई को दैनिक भास्कर की रविवारी मैगजीन में सम्पादित रूप में छपा है|) हमारे भविष्य में जितनी बाढ़ है उतना ही सूखा भी। पूर्वानुमान लगाना दूभर होता जा रहा है – सोपान जोशी सोमवार 11 जुलाई को… Read More ›