Anupam Mishra

छपाक्! – ‘जल थल मल’ की कहानी

[ यह लेख रज़ा फाउण्डेशन द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक ‘समास’ के वर्ष ७ अंक १८ में छपा है। ] सोपान जोशी  |  सभी चित्र सोमेश कुमार द्वारा   तीन व्यंजनों को मिला के बना एक शब्द है ‘छपाक्’। एक बार इसे… Read More ›

अपनी खूंटी पर टिका, एक सुनने वाला पत्रकार

….. जी हां, पत्रकार ऐसा भी होता है जो सवाल कम करे, समझे जरा ज्यादा ….. ….. लगभग ४७ साल के उनके कामकाजी जीवन में अनुपम मिश्र का बहुत कहीं आना–जाना हुआ। इस पूरी अवधि में वे नई दिल्ली के… Read More ›