Drought

सूखाः एक दरिद्र समाज की चुनावी त्रासदी

[ यह लेख ‘इंडिया टुडे’ पत्रिका के 26 जून 2019 के अंक के 36वें पन्ने पर छपा है ] – सोपान जोशी बस, एक महीने की बात है। हम बाढ़ से होने वाले नुकसान की बात कर रहे होंगे। तब… Read More ›

आग लगने पर कुंआ खोदना

अकाल अकेले नहीं आता। उससे बहुत पहले अच्छे विचारों का अकाल पड़ने लगता है। अच्छे विचार का अर्थ है अच्छी योजनाएं, अच्छे काम। यह लेख जरा पुराना है, लेकिन अकाल भी इतना नया नहीं है। अनुपम मिश्र अकाल की पदचाप… Read More ›

Mercurial Monsoon

The famously capricious rains are reinforcing their reputation every year. Our planners need to take a hand in this Act of God By SOPAN JOSHI Its semantic density is comparable to that of a block of reinforced concrete. The India… Read More ›